नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफ टाॅप योजना के तहत राज्य के शासकीय एवं निजी भवनांे की छतांे पर ग्रिड कनेक्टेड सौर संयंत्र की स्थापना छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण(क्रेडा) माध्यम से की जा रही है। उक्त परियोजना के तहत् भवनांे की उपभोग की जाने विद्युत क्षमता एव छतों पर उपलब्ध क्षेत्रफल के आधार पर 10 किलोवाट से 500 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्रों की स्थापना की गई है।

प्रदेश के विद्युत वितरण कंपनी के उपभोक्ताओं के घरों पर उपभोक्ता की विद्युत मांग अनुसार ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटाॅप सौर संयंत्र की स्थापना हेतु ”मुख्यमंत्री सौर शक्ति योजना’’ को लागु किया गया है। निम्नलिखित उद्देश्यों के पूर्ति हेतु किया गया है:-

  • राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं केा सस्ते दर पर सोलर पावर उपलब्ध कराना।
  • राज्य में Decentralized Solar Power Generation को प्रोत्साहित करना।
  • हरित ऊर्जा (Green Energy) को प्रोत्साहित कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योजना देना।
  • छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा CSPDCL हेतु समय-समय पर अधिसूचित Renewable Power Obligation के अंतर्गत सोलर पाॅवर के क्रय की बाध्यता को पूरा करने के लिए सार्थक पहल सुनिश्चित करना।
  • ऊर्जा संरक्षण के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु पारंपरिक स्त्रोत आधारित विद्युत की खपत पर निर्भरता कम करने के लिये विद्युत उपभोक्ताओं के मध्य जागरूकता लाना एवं सोलर पाॅवर प्लांट के उपयोग को प्रोत्साहित करना।

योजना क्रियान्वयन की प्रक्रिया:-

योजना अंतर्गत चयनित उपभोक्ताओं को रूफटाॅप सोलर पावर प्लांट की क्षमता के आधार पर चार श्रेणियाॅ रहेंगी।

क्रमांक श्रेणी सोलर पावर प्लांट की क्षमता
1 A 10 किलोवाट से 50 किलोवाट तक
2 B 50 किलोवाट से अधिक से 100 किलोवाट तक
3 C 100 किलोवाट से अधिक से 500 किलोवाट तक
4 D 500 किलोवाट से अधिक से 1000 किलोवाट तक

योजना के अंतर्गत राज्य के वर्तमान सोलर नीति अंतर्गत 600 मेगावाट ग्र्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटाॅप पावर प्लांट के लक्ष्य के पूर्ति हेतु ”मुख्यमंत्री सौर शक्ति योजना’’ को लागु किया गया है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार, नईदिल्ली के जवाहर लाल नेहरू नेशनल सोलर मिशन के तहत् राज्य में वृहद स्तर के ग्रिड कनेक्टेड के सोलर पावर प्लांट स्थापित किये गये है उक्त प्लांट से उत्पादित विद्युत ग्रिड मेें प्रवाहित किये जा रहे है।

सोलर पावर प्लांट से उत्पादित विद्युत ग्रिड में प्रवाहित किए जाने से कायला आधारित विद्युत की निर्भरता कम होगी तथा वायु में कार्बन डायआक्साईड, कार्बन मोनोआक्साईड तथा अन्य ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कमी आएगी जो कि पर्यावरण को प्रदुषण से बचाने में सहायक होगा।

ग्रिड कनेक्टेड ग्राऊंड माउंटेड सोलर पाॅवर प्लांट

क्रमांक सोलर फोटोवोल्टाईक पाॅवर जनरेटर पता क्षमता (मेगावाॅट में)
1 सिंघल फाॅरेस्ट्री प्राईवेट लिमिटेड ग्राम-दर्राभाठा एवं बैतारी, ब्लाॅक-सराईपाली, जिला महासमुन्द 2
2 छत्तीसगढ़ इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड ग्राम-खरोरा, तहसील-तिल्दा, जिला रायपुर 2
3 आॅरकेस्ट्रेड सिस्टम्स प्राईवेट लिमिटेड (एमवेन्सीस टेक्नालाॅजीस् प्राईवेट लिमिटेड) ग्राम-थोडा, तहसील-दुर्ग, जिला-दुर्ग 2
4 सार्थक एनर्जी प्राईवेट लिमिटेड ग्राम-बासीन, तहसील-दुर्ग, जिला-दुर्ग 2
5 एज्यूर पाॅवर इंडिया प्राईवेट लिमिटेड (प्रोजेक्ट-1) ग्राम-राजपुर/सहसपुर, तहसील-धमधा, जिला-दुर्ग 10
6 एज्यूर पाॅवर इंडिया प्राईवेट लिमिटेड (प्रोजेक्ट-2) ग्राम-राजपुर/सहसपुर, तहसील-धमधा, जिला-दुर्ग 10
7 एज्यूर पाॅवर इंडिया प्राईवेट लिमिटेड (प्रोजेक्ट-3) ग्राम-राजपुर/सहसपुर, तहसील-धमधा, जिला-दुर्ग 10
8 एक्मे रायपुर सोलर पाॅवर प्राईवेट लिमिटेड ग्राम-साल्हेभाटा, भिखापाली, तहसील-बागबाहरा, जिला-महासमुन्द 30
9 राजाराम मेज़ प्रोडक्ट्स (सोलर पाॅवर डिवीज़न) ग्राम-इन्दावानी, टेडेसरा, जिला-राजनांदगांव 4.8
10 विपुल विद्युत प्राईवेट लिमिटेड ग्राम-साल्हेभाटा तहसील-बागबाहरा, जिला-महासमुन्द 4
11 परमपूज्य सोलर एनर्जी प्राईवेट लिमिटेड (प्रोजेक्ट-1) ग्राम-राजपुर, तहसील-धमधा, जिला-दुर्ग 50
12 परमपूज्य सोलर एनर्जी प्राईवेट लिमिटेड (प्रोजेक्ट-2) ग्राम-हाथीडोब, तहसील-साजा, जिला-बेमेतरा 50
कुल 176.8

राज्य में शासकीय, अर्धशासकीय, निजी आवासीय/व्यवसायिक/ अन्य सभी प्रयोजनांें के लिए पूरे समय बिजली उपलब्ध कराना तथा प्रदेश के नागरिकों के जीवन स्तर व कार्य स्तर में में सुधार लाना सरकार के लिये प्राथमिकता का कार्य हैे। राज्य सरकार द्वारा विद्युत विभाग के माध्यम से परंपरागत बिजली उक्त प्रयोजनों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। किन्तु आज भी प्रदेश में हजारों की संख्या से भी ज्यादा स्थल ऐसी हैं, जहां परम्परागत विद्युत का प्रदाय नियमित रूप से संभव नही है। उनमे से कई स्थलों में सौर ऊर्जा के माध्यम से निःशुल्क व नियमित विद्युत की व्यवस्था की गई है।

राज्य के औद्योगिक इकाईयों को छोड़कर सभी घरेलू, शासकीय, अर्धशासकीय, सामुदायिक, व्यवसायिक, संस्थागत भवनों/स्थलों को विभिन्न आवश्यक प्रयोजनांें हेतु सोलर आॅफ-ग्रिड संयंत्रों के माध्यम से विद्युत व्यवस्था प्रदाय किया जा रहा है। इससे वहां के रहवासियों तथा कार्यकारी संस्थाओं को सभी समय बिजली की नियमित आपूर्ति निः शुल्क हो पाती है, जिससे उन्हे किसी भी कार्य में बिजली की नियमितता ना होने से रूकावट नही होती, जिससे उनके कार्यस्तर मे भी सुधार की संभावनाओं से इंकार नही किया जा सकता।

मुख्यतः इस योजना अंतर्गत निम्नाुनुसार सोलर आॅफ-ग्रिड संयंत्रों की स्थापना की जाती हैः-

  • सोलर पावर प्लांट - शासकीय व मार्केट मोड
  • सौर चलित पथ प्रकाश संयंत्र
  • सोलर होम लाईट संयंत्र
  • सोलर पावर पैक
  • अन्य फोटोवोल्टाईक संयंत्र तथा सामान्य इन्वर्टरों का सोलराईजेशन

क्रेडा द्वारा राज्य में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था एवं स्वच्छता हेतु वृहद् स्तर पर सोलर ड्यूल पंप, जिन्हंे सामान्य भाषा में सोलर हैण्ड पंप भी कहा जाता है, की स्थापना की गई है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के सभी ऐसे ग्रामों/स्थलों, जहां पेयजल व्यवस्था हेतु पूर्व से सार्वजनिक बोर उपलब्ध हैं, में सोलर ड्यूल पम्प संयंत्रों की स्थापना कर उन्हें पेयजल एवं स्वच्छता हेतु सुविधा उपलब्ध कराया जाता है।

इसके तहत् ग्राम/स्थल पर पूर्व से स्थापित सार्वजनिक बोर में सौर ऊर्जा चलित अधिकतम 01 एचपी क्षमता तक के सबमर्सिबल पंप की स्थापना की जाती है, तथा इसमें से जल का उद्वहन कर आवश्यकतानुसार 5000 या 10,000 लीटर क्षमता के ओवर हैड वाटर टैंक की स्थापना कर जल संग्रहण किया जाता है व संयंत्र से आवश्यकतानुसार दूरी पर चार स्टैंड पोस्ट स्थापित किये जाते हैं, जिससे किसी भी समय स्टैंड पोस्ट के नलों के माध्यम से जल की निकासी की जा सकती है। स्थापित सभी सोलर ड्यूल पंपों का पंचवर्षीय रखरखाव भी क्रेडा द्वारा सतत् रूप से किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप उक्तानुसार स्थापित शतप्रतिशत संयंत्र कार्यशील है। इस योजना से लाभान्वित ग्रामों के रहवासियों को स्वच्छ पेयजल प्राप्त किये जाने हेतु अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता, साथ ही स्वच्छ जल की निकट में ही उपलब्धता से वे स्वच्छता की ओर आकर्षित होकर अपने रहन-सहन व जीवन शैली में निरंतर सुधार कर पा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य के वनबाधित, दूरस्थ एवं उन पहुंचविहीन ग्रामों में जहां परंपरागत विद्युत नहीं पहुंच पाती है, वहां क्रेडा द्वारा सौर संयंत्रों की स्थापना कर ग्रामों का विद्युतीकरण किया जाता है। उन ग्रामों के हितग्राही परिवारों का चयन कर उन्हें सौर संयंत्र के माध्यम से विद्युत आपूर्ति की जाती है। स्थापित सौर संयंत्रों से प्रस्तावित सभी घरों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बिजली के खंभे, खंभें से खंभें की वायरिेंग, सभी प्रस्तावित घरों की अंदरूनी वायरिंग तथा प्रकाश व्यवस्था हेतु ऊर्जा दक्ष बल्ब स्थापना का कार्य भी किया जाता है।

क्रेडा द्वारा राज्य में ऐसे कृषकों जिनके कृषि भूमि जलस्त्रोत के निकट होने के बावजूद उचित सिंचाई साधनों के अभाव में सिंचाई सुविधा से वंचित कृषकों के छोटे रकबों के समूहों को सामुदायिक रूप से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराये जाने के उद्देयश्य से वृहद स्तर पर सोलर पंपों की स्थापना की गई है। साथ ही बड़े रकबों में भी योजनांतर्गत सोलर पंपों के साथ ही अन्य आवश्यक अधोसंरचनाओं की स्थापना कर कृषकों को सामुदायिक रूप से सौर प्रणाली से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत् कृषक समूहों के कृषि योग्य भूमि के निकट उपलब्ध जलस्त्रोत में सोलर पंपों व अन्य आवश्यक अधोसंरचनाओं यथा इंटेक / बफर वेल, प्लेटफाॅर्म, कंट्रोंल रूम, पाईप पाईन वितरण प्रणाली इत्यादि की स्थापना कर जल का उद्वहन किया जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामों में निवास करती है, व राज्य की लगभग 40 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र के भीतर है। यहां की अधिकतर जनसंख्या ग्रामों व छोटे शहरों/कस्बों में है। शासन इन ग्रामों, छोटे शहरों/कस्बों में सतत् विकास हेतु तत्परता से ध्यान दे रही है। राज्य की भूमि को खनिज तत्व वरदान के रूप में प्राप्त है, किन्तु इन वरदानरूपी खनिज तत्वों के प्रभावशील स्थलों की भूमिगत जल में भी मिश्रित हो जाने से आसपास के ग्रामों का जल पीने योग्य नही रह जाता है। इस प्रकार के खनिजयुक्त जल के सेवन से अनेकों प्रकार की बिमारियाॅं होती हैं। किन्तु उचित जानकारियों व व्यवस्थाओं के अभाव में आमजनों के पास इस प्रकार के जल को पीने के अतिरिक्त किसी प्रकार का विकल्प नही होता है। इस समस्या के निवारण के लिए ऐसे ग्रामों को जिनके भूमिगत जल में हानिकारक खनिज तत्वों की मात्रा मानक से अधिक है, में पेयजल हेतु उपलब्ध जलस्त्रोतों में सौर ऊर्जा प्रणाली आधारित जल शुद्धिकरण संयंत्र मय वाटर ए.टी.एम. की स्थापना कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। जिससे प्रभावित ग्रामों के रहवासी पेयजल हेतु शुद्ध जल प्राप्त कर स्वस्थ जीवन जी पा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण, क्रेडा द्वारा राज्य के ग्रामीण अंचलों के बेहतर बुनियादी सुविधाओं के सुदृीकरण हेतु राज्य के ग्रामों के हाट-बाजारों, गलियों, चैक-चैराहों पर सोलर हाई मास्ट संयंत्रों की स्थापना का कार्य किया जा रहा है। योजनांतर्गत प्रस्तावित/चयनित स्थल जो कि सामान्यतः मुख्य चैक/चैराहे होते हैं, में सौर प्रणाली युक्त एल.ई.डी. लाईटों की स्थापना निर्धारित ऊंचाई के एम.एस. पोल पर की जाती है। चूंकि इन संयंत्रों का उपयोग रात्रि अवधि में किया जाना होता है, अतः इसमें सौर प्रणाली उपयुक्त स्वतः चार्ज होने वाली बैटरी भी स्थापित की जाती है जिनमें न्यूनतम 2 दिवस का बैक-अप होता है।

बड़े शहरों में किसी परिसर की बाहरी प्रकाश व्यवस्था हेतु हाईमास्ट लगाये जाते हैं जिनसे एक बड़े क्षेत्र की बाहरी प्रकाश व्यवस्था की जाती है जो कि परम्परागत बिजली से संचालित किये जाते है जिनमें बहुत अधिक विद्युत की खपत होती है। जबकि सोलर हाई मास्ट संयंत्र में सोलर पैनल की सहायता से दिन मे बैटरी चार्ज कर रात में लाईट जलाई जाती है जिससे परम्परागत विद्युत की बचत होती है।

इस योजना के क्रियान्वयन से राज्य के ग्रामों, कस्बों/ प्रस्तावित स्थलों के मुख्य चैराहों पर ना केवल प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित हो पाती है, अपितु उन प्रमुख चैराहों का सौंदर्यीकरण भी स्थापित किये गये हाई मास्ट संयंत्रों से संभव हो पा रहा है। इन संयंत्रों की स्थापना से चैराहों के निकट अंधकार के कारण होने वाली दुर्घटनाएं, अपराध इत्यादि घटनाओं में कमी आने के साथ ही आसपास के छोटे व्यवसायी रात्रि अवधि में भी अपना व्यवसाय कर अपने जीवन स्तर में व्यापक सुधार कर पा रहे हैं।

राज्य के आदिवासी तथा पिछड़े क्षेत्र के छात्र/छात्राओं को बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना तथा उनके जीवन स्तर में सुधार लाना सरकार के लिये प्राथमिकता का कार्य हैे। जिसके तहत प्रदेश में 2000 से भी ज्यादा आवासीय शासकीय शैक्षणिक संस्था संचालित किये जा रहे हैं। प्रदेश के बहुत से आवासीय शासकीय शैक्षणिक संस्था पहुंचविहिन एवं दूरस्थ स्थलों में स्थापित हैं, जहां परम्परागत विद्युत का प्रदाय नियमित रूप से संभव नही है। उनमे से कई स्थलों में सौर ऊर्जा के माध्यम से विद्युत प्रदाय कर प्रकाश की व्यवस्था की गई है। आवासीय शासकीय शैक्षणिक संस्थाों में अध्ययनरत् छात्र/छात्राओं के मनोरंजन एवं सामान्य ज्ञान बढ़ाने तथा देश-विदेश के समाचारों से उन्हे जागरूक बनाने की दृष्टि से सोलर टी.वी. की स्थापना की जाती है।

राज्य के आवासीय शैक्षणिक संस्थाओं में स्थापित किये गये सोलर टी.वी. से वहां रह रहे छात्र/छात्राओं को मनोरंजन की सुविधा मिलने के साथ ही यह उनके सामान्य ज्ञान व देश एवं विदेश के समसामयिक ज्ञान के स्तर को बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है तथा इससे मिलने वाले देश एवं विदेश के खबरों व ज्ञान से छात्र/छात्राओं के रहन-सहन व जीवन शैली मे भी सुधार प्राप्त हो रहा है।

कृषि के लिये सिंचाई एक अत्यन्त महत्वपूर्ण घटक है। राज्य के कई किसान ऐसे हैं, जिनके खेत बिजली की लाईन से बहुत दूर हैं। इनकी कनेक्टिविटी में उन्हें बहुत खर्च आ रहा है, अतः राज्य शासन द्वारा एक विशेष योजना तैयार की गई है, ताकि ऐसे किसानों के यहाॅं अत्यन्त आकर्षक अनुदान पर सोलर पम्प स्थापित किये जा सकें। इससे न सिर्फ उन्हें 25 वर्षों तक पम्प हेतु निःशुल्क बिजली मिलेगी, बल्कि सिंचाई सुविधा मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकेगी।

बड़े शहरों में किसी परिसर की बाहरी प्रकाश व्यवस्था हेतु हाईमास्ट लगाये जाते हैं जिनसे एक बड़े क्षेत्र की बाहरी प्रकाश व्यवस्था की जाती है जो कि परम्परागत बिजली से संचालित किये जाते है जिनमें बहुत अधिक विद्युत की खपत होती है। जबकि सोलर हाई मास्ट संयंत्र में सोलर पैनल की सहायता से दिन मे बैटरी चार्ज कर रात में लाईट जलाई जाती है जिससे परम्परागत विद्युत की बचत होती है।

सूरज से प्राप्त किरणों से प्राप्त प्रकाश का उपयोग विद्युत उत्पा दन में किया जाता है, सूरज से ऊर्जा प्राप्त करने के माध्यम में ना केवल उसका प्रकाश अपितु सूरज के किरणों से प्राप्त गर्मी का उपयोग भी किया जाता है। इस प्रकार से प्राप्त ऊर्जा को सौर तापीय ऊर्जा कहा जाता है। क्रेडा द्वारा इस तकनीक से चलित सोलर स्टीम कुकिंग संयंत्र, सोलर एयर कंडिषनिंग संयंत्र, सोलर गर्म जल संयंत्र, सोलर कुकर संयंत्रों के स्थापना/प्रदाय कार्य किया जा रहा है।

इस योजना का उद्येश्य राज्य के विभिन्न शासकीय संस्थानों में जहां, भोजन निर्माण के लिए अधिक मात्रा में गैस सिलेंडर अथवा लकडी का उपयोग किया जाता है वहां सौर तापीय तकनीक पर आधारित संयंत्र के माध्यम से भोजन पकाने की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराना है तथा साथ ही ऐसे शासकीय संस्थान/भवन जहां एयर कंडिषनिंग के कारण अधिक बिजली बिल आता है वहां सौर तापीय तकनीक पर आधारित संयंत्र के माध्यम से एयर कंडिषनिंग की व्यवस्था उपलब्ध कराना है साथ ही गर्म जल उपलब्धता हेतु सौर गर्म जल संयंत्रों की स्थापना किया जा ना है। इन संयंत्रों की स्थापना कर शासन तथा संस्थाओं/ नागरिकों को अनावश्यक रूप से हो रही आर्थिक हानि को जहां तक हो सके कम करना है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अपारंपरिक एवं स्वच्छ ऊर्जा स्त्रोतों को बढ़ावा देने एवं ग्रामीण क्षेत्रों में धुआंरहित स्वच्छ ईंधन प्रदाय हेतु ‘‘उन्नत चूल्हा अभियान’’ ;न्ब्।द्ध संचालित की जा रही है । इस कार्यक्रम के अंतर्गत् डछत्म् अनुमोदित बायोमास कुकस्टोव के उपयोग से लगभग 50-60 प्रतिशत लकड़ी की बचत होती है तथा धुंआं भी नही निकलता है । बायोमास कुकस्टोव के उपयोग से लकड़ी की बचत एवं स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। इससे ग्रामवासियों के आर्थिक बचत के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है । वनों की कटाई भी कम होती है ।